नई दिल्ली: कर्ज का बढ़ना बैंकिंग सेक्टर और उद्योग जगत के लिए अच्छी बात है लेकिन जब कर्ज की रफ्तार एक सीमा से ज्यादा हो तो इससे चिंता भी बढ़ जाती है। कुछ ऐसी ही स्थिति देश में पर्सनल लोन की बढ़ती रफ्तार को लेकर है।
पिछले दो साल में 30 प्रतिशत बढ़ा पर्सनल लोन
पिछले दो वर्षों से पर्सनल लोन की रफ्तार में औसतन 30 फीसद की वृद्धि हो रही है। इस पर आरबीआई ने सभी बैंकों व गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) को सतर्क किया है।
आरबीआई के डिप्टी-गवर्नर स्वामीनाथन जानकीरमण का कहना है कि, पिछले दो वर्षों से बैंकों की तरफ से वितरित कर्ज की दर में 13-14 फीसद की वृद्धि हो रही है जबकि पर्सनल कर्ज 30 फीसद की तेजी से बढ़ी है जो काफी ज्यादा है।
ऐसे में हम बैंकों को इस वृद्धि के बारे जानकारी मुहैया करा रहे हैं। यह पूछे जाने पर कि क्या केंद्रीय बैंक पर्सनल कर्ज की इस वृद्धि को रोकने के लिए कोई अतिरिक्त कमद उठाएगा तो जानकीरमण का जवाब था कि, अभी इस बारे में विचार नहीं किया जा रहा।
क्या होता है पर्सनल लोन?
पर्सनल लोन एक ऐसा लोन है जिसके लिए कोई गारंटी या सुरक्षा की आवश्यकता नहीं होती है। यह लोन लेनदार को न्यूनतम दस्तावेजीकरण के साथ दिया जाता है।
आप इस लोन से का उपयोग किसी भी वैध वित्तीय आवश्यकता के लिए कर सकते हैं। इस लोन पर आम तौर पर आसान समान मासिक किस्तों होती है जो कुछ महीनों से लेकर कुछ वर्षों तक हो सकती है।
हर बैंक का पर्सनल लोन पर ब्याज दर अलग-अलग होता है। आपको कितने ब्याज दर पर पर्सनल लोन दिया जाएगा यह आपके क्रेडिट इतिहास, कार्यकाल, आय, व्यवसाय आदि पर निर्भर करता है।