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दहेज हत्या में हुई थी उम्र कैद; हाईकोर्ट ने पलटा फैसला; जेल में रहकर डिप्लोमा व डिग्री ली

sampurantoday by sampurantoday
March 9, 2023
in मध्य प्रदेश
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दहेज हत्या में हुई थी उम्र कैद; हाईकोर्ट ने पलटा फैसला; जेल में रहकर डिप्लोमा व डिग्री ली
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बस! मेरा समय खराब था। एक बेगुनाह के जेल जाने के बाद न केवल मैं, बल्कि मेरा पूरा परिवार बिखर गया। मैंने जेल में 11 साल बेगुनाही के गुजारे। इसके साथ ही डिप्लोमा के साथ ग्रेजुएशन भी किया। अब मैं जेल से छूट गया हूं। पोस्ट ग्रेजुएट की पढ़ाई करूंगा। इसके साथ ही नई जिंदगी शुरू करूंगा।

आगर के रहने वाले इस शख्स को पत्नी की दहेज हत्या के केस में सजा हुई थी। तब उसकी उम्र 23 साल थी। 12वीं तक पढ़ाई की थी। जेल से छूटने पर अब 34 साल के हो चुके हेमराज माली का कहना है कि जेल तो जेल होती है। वहां केवल आप खुद को अच्छे कामों में व्यस्त रखें तो ही आसानी से निकल सकते हैं।

जानिए, कैसे पहुंचा जेल

घटना 26 फरवरी 2012 की है। इस दिन सुबह हेमराज ने पत्नी ऋतु के साथ घर में चाय पी। फिर सारंगपुर के लिए रवाना हो गया। इसके बाद 11 बजे उसके भाई विनोद ने सूचना दी कि भाभी ऋतु कमरे का दरवाजा नहीं खोल रही है और न ही कॉल रिसीव कर रही है। इस पर हेमराज दोपहर करीब 12 बजे घर पहुंचा। दरवाजा तोड़ा तो अंदर पत्नी मृत पड़ी थी। उसने पुलिस को सूचना दी। मामले में पुलिस ने कई बिंदुओं पर जांच कर दहेज हत्या के मामले हेमराज, उसके पिता सत्यनारायण, भाई विनोद और भाभी सीमा के खिलाफ दहेज हत्या का केस दर्ज किया।

घटना का प्रत्यक्ष साक्षी नहीं है, जब्ती भी नहीं

सेशन कोर्ट (सुसनेर) में करीब ढाई साल सुनवाई चली। कोर्ट ने हेमराज को दोषी पाते करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई, जबकि पिता, भाई व भाभी को संदेह का लाभ देकर बरी कर दिया। 2014 में हेमराज की ओर से हाईकोर्ट इंदौर में अपील की गई, लेकिन प्रावधान के अनुसार पांच साल बाद अपील के लिए कहा गया। इसके बाद 2022 में सुनवाई शुरू हुई। आरोपी की ओर से पैरवी एडवोकेट मनीष यादव ने की। उन्होंने तर्क रखे घटना का प्रत्यक्ष साक्षी नहीं है और न ही घटना में कोई हथियार का उपयोग किया गया। हेमराज से जब्ती भी नहीं हुई है और न ही दहेज मांगने के तथ्य सामने आए हैं।

सास-ससुर के बयान को आधार बनाया

एडवोकेट यादव ने यह तर्क भी दिया कि मृतका ऋतु के माता-पिता ने बयानों में स्वयं स्वीकार किया कि दोनों परिवारों की आर्थिक स्थिति कमजोर थी। बेटी ने पति हेमराज को लेकर कभी शिकायत नहीं की। घटना की सूचना हेमराज द्वारा ही तुरंत पुलिस को दी गई। निचली अदालत ने केवल संदेह के आधार पर आरोपी को दोषी माना है, जबकि साक्ष्य नहीं है और न ही आशय सिद्ध किया गया है।

चरित्र भी अच्छा बताया

एडवोकेट यादव ने हाईकोर्ट को अवगत कराया कि हेमराज 11 साल से जेल में है। उसने जेल में रहकर भरण-पोषण, एचआईवी संबंधी डिप्लोमा करने के साथ ग्रेजुएशन भी पूरा कर लिया है, इसलिए इस अपील को स्वीकार किया जाए। मामले में यादव ने न्याय दृष्टांत सुप्रीम कोर्ट के कुछ दस्तावेज पेश किए। इन तर्कों से सहमत होकर हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए टिप्पणी की कि निचली अदालत ने संदेह का लाभ न देकर गंभीर त्रुटि की है। इसके साथ ही हेमराज की रिहाई के आदेश दिया। इस दौरान हेमराज उज्जैन की सेंट्रल जेल में था जहां से उसे 28 फरवरी को जेल से रिहा किया गया।

मैंने खुद की पढ़ाई, पढ़ाने में रखा खुद को व्यस्त

हेमराज ने बताया कि जेल में रहकर मुझे पाठशाला (लाइब्रेरी) का काम दिया गया था। यहां मैं खुद की पढ़ाई तो करता ही था, अन्य कैदियों को पढ़ाता था। लाइब्रेरी में 3 हजार से ज्यादा ज्ञानवर्धक किताबें हैं। मैंने अधिकांश समय यहीं बिताया, जिससे समय अच्छा बीत गया। शुरू में मैं लगातार आठ साल जेल में रहा। फिर कोरोना के समय 10 महीने तक पैरोल के रूप में बाहर भी रहा। देर से ही सही मैं बेगुनाह साबित हुआ। मैं हाईकोर्ट के फैसले का सम्मान करता हूं। मैं अपनी जिंदगी में 11 साल पीछे हो गया हूं। अब शादी का कोई इरादा नहीं है। सिर्फ पढ़ाई करना चाहता हूं।

हाई कोर्ट में बचाव पक्ष के ये तर्क रहे मजबूत

– बचाव पक्ष के एडवोकेट मनीष यादव ने तर्क रखा कि हेमराज अपनी पत्नी ऋतु के साथ परिवार से अलग रहता था।

– निचली अदालत में बहस के दौरान जांचकर्ता ने बयान दिया कि घटना वाले सबसे पहले बबीता नामक गवाह ने ऋतु का शव देखा था और विनोद को सूचना दी थी। – खास तथ्य यह रहा कि जब ऋतु अपने कमरे में मृत पाई गई तो हेमराज बाजार में था। – पुलिस ने केवल संदेह के आधार पर केस दर्ज किया जबकि हत्या का कोई प्रमाण नहीं है। – ऋतु अपने कमरे में जब मृत पाई गई तो अकेली थी। उसके कमरे में कोई नहीं आया था और ऋतु खुद भी बाहर नहीं देखी गई थी। – हेमराज पर हत्या करने का कोई प्रमाण नहीं है और न ही हत्या का कोई उद्देश्य सामने आया।

– घटना वाले दिन भाई विनोद ने हेमराज को फोन पर सूचना दी थी कि भाभी ऋतु की मौत हो चुकी है। इसके चार दिनों बाद पुलिस ने केस दर्ज किया। क्रॉस एक्जामिनेशन में जांच अधिकारी ने खुद स्वीकारा कि पुलिस ने कॉल डिटेल्स पेश नहीं की।

– बचाव पक्ष के वकील ने न्याय दृष्टांत सत्यसिंह V/s उत्तराखण्ड केस का हवाला दिया कि इस पूरी घटना की कड़ी मिलाने में असफल रहा है। – हेमराज दहेज प्रताड़ना के मामले में 10 साल की सजा काट चुका है, इस देखते हुए विचार किया जाए।

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