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इंसानों में ब्रेन चिप का टेस्ट करेंगे मस्क:बोले- केवल सोचने भर से मोबाइल चलेगा, ब्लाइंड इंसान भी देख सकेंगे

sampurantoday by sampurantoday
December 2, 2022
in व्यापार
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इंसानों में ब्रेन चिप का टेस्ट करेंगे मस्क:बोले- केवल सोचने भर से मोबाइल चलेगा, ब्लाइंड इंसान भी देख सकेंगे
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आने वाले दिनों में एक चिप के जरिए ब्लाइंड इंसान भी देख सकेंगे, पैरालिसिस से पीड़ित इंसान केवल दिमाग में सोचकर मोबाइल और कंप्यूटर ऑपरेट कर सकेंगे। ये दावा है दुनिया के सबसे अमीर कारोबारी और न्यूरालिंक के फाउंडर एलन मस्क का। उन्होंने न्यूरालिंक के कैलिफोर्निया हेडक्वार्टर में ‘शो एंड टेल’ इवेंट किया और अपने इस डिवाइस की प्रोग्रेस की जानकारी दी।

मस्क ने बताया कि उनके ब्रेन चिप इंटरफेस स्टार्टअप का डेवलप वायरलेस डिवाइस 6 महीने में ह्यूमन ट्रायल के लिए तैयार हो जाएगा। इसके लिए फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) को पेपर जमा कर दिए गए हैं। मस्क ने 6 साल पहले ब्रेन कंट्रोल इंटरफेसेस स्टार्टअप की स्थापना की थी और 2 साल पहले अपने इम्प्लांटेशन रोबोट को दिखाया था।

टेलीपेथी के जरिए बंदर ने टायपिंग की
इवेंट में मस्क ने जॉयस्टिक का इस्तेमाल किए बिना एक बंदर का पिनबॉल खेलते हुए वीडियो भी दिखाया। टेलीपेथी के जरिए बंदर ने टाइपिंग भी की। न्यूरालिंक टीम ने उसके सर्जिकल रोबोट को भी डेमोन्सट्रेट किया। इसमें दिखाया गया कि कैसे रोबोट पूरी सर्जरी को अंजाम देता है।

न्यूरालिंक डिवाइस क्या है?
1. फोन को सीधे ब्रेन से जोड़ेगा
न्यूरालिंक ने सिक्के के आकार का एक डिवाइस बनाया है जिसे "लिंक" नाम दिया गया है। ये डिवाइस कंप्यूटर, मोबाइल फोन या किसी अन्य उपकरण को ब्रेन एक्टिविटी (न्यूरल इम्पल्स) से सीधे कंट्रोल करने में सक्षम करता है। उदाहरण के लिए, पैरालिसिस से पीड़ित व्यक्ति मस्तिष्क में चिप के प्रत्यारोपित होने के बाद केवल यह सोचकर माउस का कर्सर मूव कर सकेंगे कि वे इसे कैसे मूव करना चाहते हैं।

2. कॉस्मैटिक रूप से अदृश्य चिप
न्यूरालिंक ने कहा, हम पूरी तरह से इम्प्लांटेबल, कॉस्मैटिक रूप से अदृश्य ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस डिजाइन कर रहे हैं, ताकि आप कहीं भी जाने पर कंप्यूटर या मोबाइल डिवाइस को कंट्रोल कर सकें। माइक्रोन-स्केल थ्रेड्स को ब्रेन के उन क्षेत्रों में डाला जाएगा जो मूवमेंट को कंट्रोल करते हैं। हर एक थ्रेड में कई इलेक्ट्रोड होते हैं और उन्हें "लिंक" नामक इम्प्लांट से जोड़ता है।

3. रोबोटिक प्रणाली डिजाइन की
कंपनी ने बताया कि लिंक पर थ्रेड इतने महीन और लचीले होते हैं कि उन्हें मानव हाथ से नहीं डाला जा सकता। इसके लिए कंपनी ने एक रोबोटिक प्रणाली डिजाइन की है जिससे थ्रेड को मज़बूती से और कुशलता से इम्प्लांट किया जा सकता है।

इसके साथ ही न्यूरालिंक ऐप भी डिजाइन किया गया है ताकि ब्रेन एक्टिविटी से सीधे अपने कीबोर्ड और माउस को बस इसके बारे में सोच कर कंट्रोल कर सकते हैं।

डिवाइस को चार्ज करने की भी जरूरत होगी। इसके लिए कॉम्पैक्ट इंडक्टिव चार्जर डिजाइन किया गया है जो बैटरी को बाहर से चार्ज करने के लिए वायरलेस तरीके से इम्प्लांट से जुड़ता है।

एक चिप लाएगी क्रांति
न्यूरालिंक ने कहा, हमारी तकनीक का प्रारंभिक लक्ष्य पैरालिसिस वाले लोगों को कंप्यूटर और मोबाइल डिवाइसेस का नियंत्रण देना है। हम उन्हें इंडिपेंडेंट बनाना चाहते हैं। हम चाहते हैं कि एक दिन हमारे डिवाइस के जरिए ऐसे लोग फोटोग्राफी जैसी अपनी क्रिएटिविटी भी दिखा सके। हमारा मानना ​​है कि इस तकनीक में कई सारे न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर का इलाज करने की क्षमता है।

क्या इसे लगाना सेफ होगा?
चिप इम्प्लांट करने में हमेशा जनरल एनेस्थेसिया से जुड़ा रिस्क होता है। ऐसे में प्रोसेस टाइम को कम करके रिस्क कम किया जा सकता है। कंपनी ने इसके लिए न्यूरोसर्जिकल रोबोट डिजाइन किया है, ताकि यह बेहतर तरीके से इलेक्ट्रोड को इम्प्लांट कर सकें।

इसके अलावा, रोबोट को स्कल (खोपड़ी) में 25 मिमी डायामीटर के एक छेद के जरिए थ्रेड डालने के लिए डिजाइन किया गया है। ब्रेन में एक डिवाइस डालने से ब्लीडिंग का भी रिस्क है। कंपनी इसे कम करने के लिए माइक्रो-स्केल थ्रेड्स का उपयोग कर रही है।

ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस का इस्तेमाल
एलन मस्क जिस टेक्नोलॉजी के जरिए चिप बना रहे हैं उसे ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस या शॉर्ट में BCIs कहा जाता है। इस पर कई और कंपनियां भी सालों से काम कर रही है। ये सिस्टम ब्रेन में रखे गए छोटे इलेक्ट्रोड का इस्तेमाल पास के न्यूरॉन्स से संकेतों को "पढ़ने" के लिए करते हैं। इसके बाद सॉफ्टवेयर इन सिगनल्स को कमांड या एक्शन में डिकोड करता है, जैसे की कर्सर या रोबोटिक आर्म को हिलाना।

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